Skip to main content

कौन से पात्र में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है!

कौन से पात्र में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है इस विषय पर संक्षेप में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी अवश्य रखें।



(१) सोना:-
सोना एक गर्म धातु है ! सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है!

(२) चाँदी:-
चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है ! शरीर को शांत रखती है ! इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है!

(३) कांसा:-
काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है! लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए ! खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है ! जो नुकसान देती है ! कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं!

(४) तांबा:-
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है ! इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है ! तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए ! इससे शरीर को नुकसान होता है!

(५) पीतल:-
पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती ! पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं!

(६) लोहा:-
लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है ! लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है और पीलिया रोग को दूर रखता है ! लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है ! लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है!

(७) स्टील:-
स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से ! इसलिए नुक्सान नहीं होता है ! इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता!

(८) एल्युमिनियम:-
एल्युमिनियम बोक्साईट का बना होता है ! इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है ! यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है ! इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए ! इससे हड्डियां कमजोर होती है, मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है ! उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है ! एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं!

(९) मिट्टी:-
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं ! जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते है ! इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं ! आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिये ! भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है ! लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है ! दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त है मिट्टी के बर्तन ! मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं !

(१०) पत्तों पर भोजन करना:-
आप केले के पत्तों, वट वृक्ष के पत्तों, पलाश के पत्तों इत्यादि पर भी भोजन कर सकते हैं। यदि ताजा पत्ते मिले तो और भी उत्तम, फिर भी यदि ताजा उपलब्ध न भी हो तो सुखी पत्तल पर भी भोजन कर सकते है। इन पत्तों में सात्विकता, ऊर्जा और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में रहती है।

#TheEraOfRevolution
#Sanatana #सनातन
#Ayurveda #आयुर्वेद

Comments

Popular posts from this blog

कॉन्वेंट शिक्षा पद्धति का सत्य

◆ कॉन्वेंट शिक्षा पद्धति का सत्य ◆ ◆ Truth of Convent Education ◆ भारत में आज भी चाहे शादी के पत्र देख लो चाहे नौकरी के, उसमे बड़े बड़े शब्दों में लिखा जाता है 'कॉन्वेंट एजुकेटेड'। कान्वेंट शब्द पर बहुत कूदें मत बल्कि सच को समझे।  ‘ कॉन्वेंट ’ यानी सबसे पहले तो यह जानना आवश्यक है कि ये शब्द आखिर आया कहाँ से है??? गोरों में एक प्रथा थी ' लिव इन रिलेशनशिप' यानी बिना किसी वैवाहिक संबंध के एक लड़का और एक लड़की का साथ में रहना। आजकल भारत मे इसका सबसे ज्यादा बोलबाला है। लड़का लड़की जब साथ में रहते थे तो शारीरिक संबंध भी बन जाते थे, तो इससे जो संतान पैदा हो जाती थी तो उन संतानों को किसी चर्च में छोड़ दिया जाता था।यानी जो बच्चे बिन ब्याहे माँ बापों की औलाद होते थे उन्हें चर्च में छोड़ दिया जाता था। अगर आज भी आप देखें तो बहुत से चर्च बाहर पालना रखते हैं, अनाथालयों की शुरुआत ही ईसाइयत से हुई। तो वहां की सरकार के सामने यह गम्भीर समस्या हुई कि इन बच्चों का क्या किया जाए तब वहाँ की सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए कॉन्वेंट खोले अर्थात जो बच्चे अनाथ होने के साथ-साथ नाजायज हैं उन...

वैदिक रक्षाबन्धन- इस तरह से बनाए वैदिक राखी।

वैदिक रक्षाबंधन -  प्रतिवर्ष श्रावणी-पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार होता है, इस बार 22 अगस्त 2021 रविवार के दिन है। इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं । यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है । 🌷 वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि 🌷 🙏🏻 इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है - (१) दूर्वा (घास)  (२) अक्षत (चावल)  (३) केसर  (४) चन्दन  (५) सरसों के दाने 🙏🏻 इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी । 🌷 इन पांच वस्तुओं का महत्त्व 🌷 ➡ (१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढ़ता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए । ➡ (२) अक्षत - हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना ह...